उपरवाले पर भरोसा


जंगल में एक गर्भवती हिरनी बच्चे को जन्म देने वाली थी ।  वो एकांत जगह की तलाश में घूम रही थी । उसे नदी किनारे ऊँची और घनी घास दिखी । उसे वो उपयुक्त स्थान लगा शिशु को जन्म देने के लिये ।

वहां पहुँचते  ही उसे प्रसव पीड़ा शुरू हो गयी । उसी समय आसमान में घनघोर बादल वर्षा को आतुर हो उठे और बिजली कड़कने लगी । उसने दाँये देखा तो एक शिकारी तीर का निशाना उस की तरफ साध रहा था ।  घबराकर वह दाहिने मुड़ी तो वहां एक भूखा शेर झपटने  को तैयार बैठा था । सामने सूखी घास आग पकड़ चुकी थी और पीछे मुड़ी तो नदी में जल बहुत था ।

मादा हिरनी क्या करती ? वह प्रसव पीड़ा से व्याकुल थी ।
अब क्या होगा ?

 
वो एक तरफ आग से घिरी है और पीछे नदी है क्या करेगी वो ?
उसने अपने आप को शून्य में छोड़ , अपने बच्चे को जन्म देने में लग गयी ।


 
कुदरत का करिश्मा देखिये ..


बिजली चमकी और शिकारी का तीर छोड़ते हुए आँखे चौंधिया गयी और उस का तीर हिरनी के पास से गुजरता हुआ शेर को जा लगा ।

घनाघोर बारिश शुरू हो गयी और जंगल की आग बुझ गयी ।

हिरनी ने शावक को जन्म दिया ।

हमारे जीवन में भी कुछ क्षण ऐसे आते है जब हम चारो तरफ से समस्याओं से घिरे होते है और कोई निर्णय नहीं ले पाते । तब कुछ पल ऐसे आते हम शून्य हो कर सब कुछ नियती के हाथों में छोड़ देते है जैसे उस हिरनी  ने किया ।


जो पहली प्राथमिकता हो वो करो जैसे हिरनी ने शावक को जन्म दिया, बाक़ी प्रभु  पर छोड़ दो ।


🙏🙏💐💐

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About सौरभ मैथिल

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