होली-पर्व


होली-पर्व मिथिलांचल के साथ-साथ पुरे भारत में बहुत ही धूम-धाम से मनाई जाती है | होली से एक दिन पूर्व होलिका-दहन का आयोजन किया जाता है | होली का त्योहार एक तरह से दुश्मनी भुलाकर, प्रसन्नता और उल्लास एक-दुसरे के साथ बांटने का त्योहार है | होली के दिन घर में तरह-तरह के पकवान पकाए जाते है , जिनमे माल-पूवा बहुत ही खास है | इस दिन बड़े बुजुर्ग के चरणों में छोटे अबीर रख कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं | होली का रंग बच्चों पर खास तौर पर नजर आती है |
                                             नए-नए शादी-शुदाओं की तो मानो लौटरी ही निकल पार्टी है | ये लोग ससुराल में जाकर अपनी सालियों के साथ होली का भरपूर आनंद लेते हैं| रंगों का त्योहार होली में अब लोग रंगों से परहेज करने लगे हैं | कई बार तो रंगों को लेकर मारपीट तक की नौबत आ जाती है | लेकिन ऐसा नहीं करना चाहिए, अगर कोई व्यक्ति रंग नही लगाना चाहते हैं तो उनको गुलाल लगाएँ परन्तु मारपीट ना करें |
                                                                  कुछ लोग तो नशा-पान भी करते है जो की उन्हें नहीं करनी चाहिए, खैर अपनी-अपनी सोच | इन शराबियों का क्या ? गम भुलाना हो या ख़ुशी मनाना हो सब में इनको सिर्फ नशा-पान करना ही दिखाई देता है | जैसे की:-

हर मर्ज की बस एक दवा, पिलो भैया और हो जाओ हवा
सुबह सबेरे सोते-जागते, जब भी मिले दौरते-भागते
पीना है बस पीना, हररोज पिते रहना है
रुकना है बस शमसान जाके, नही तो बस पीना है
ये दुनिया है शराबियों की जहाँ भी खोजो वही मिल जाए
पीले और औरों को भी पिलाए ,
गम भुलाती है शराब औरों को रुलाती है शराब
अपनी क्या ,ख़ुशी भी दिलाती है शराब ||
देखो भैया कोई भी पिलादे , जिस को मन हो वही मना ले
घर में आये बच्चा या फिर घर से जाये बच्चा
सब के लिए बस एक, ही नारा
पिलो शराब और पिला दो शराब |
किसी का घर बसे या टूटे, अपने को क्या
अपने को तो बस पानी मिलाना है और पिते ही जाना है
जब पिलाने वाले यही सोचते कि
हर मर्ज की बस एक दवा, पिलो भैया और हो जाओ हवा
तो फिर अपने को क्या, अपने को तो बस पीना है
सुबह सबेरे सोते जागते, जब भी मिले दौरते भागते
पीना है बस पीना , हररोज पिते रहना है
सभी शराबियों का बस एक ही नारा
पिलो शराब और पिला दो शराब |
धन्यवाद ! शराबियों, आप के कारन ही हमें यह कविता लिखने का मौका मिला, लेकिन हमारा आप सबों से गुजारिश है की हमारा एक अतंत महत्वपूर्ण पोस्ट जरुर पढ़ें

धुम्रपान मनुष्यों के लिए अभिशाप क्यूँ ?

 जो की आप के और आप के परिवार वालों के लिए बहुत ही लाभदायक है |

                                    तो आइये हम सब मिल के होली का आनंद उठाते है | सारे ग़मों को भुलाकर एक हो जाये | और बोले सारा रा रा, होली है, भाई होली है, सब मिल खेलो होली है, बुरा ना मानो होली है |

           आप सबों को होली और होलिकादहन की ढेर सारी शुभकामनाएं |
Share on Google Plus

About सौरभ मैथिल

This is a short description in the author block about the author. You edit it by entering text in the "Biographical Info" field in the user admin panel.

1 comments:

Thanks for your valuable feedback. Please be continue over my blog.

आपकी बहुमूल्य प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद। कृपया मेरे ब्लॉग पर आना जारी रखें।

Disclaimer: इस ब्लॉग पर बहुत जगहों से content को उपलब्ध किया जा रहा है, अगर आपको लगे की ये चीज आपकी है तो आप सम्बंधित पोस्ट पर कमेंट करें ना की हमें कॉल करने की कोशिश ।