विज्ञान के क्षेत्र में मैथिली

आज अगर किसी विज्ञान के पुस्तक की चर्चा करें तो किसी भी स्तर पर मैथिली में विज्ञान की पुस्तक संभवतः नही मिलता है | मगर जैसे +2 स्तर की थोड़ी सी पुस्तक राष्ट्रभाषा में लिखी गयी है उस से बहुत परदेश के विद्यार्थी लाभान्वित हुए हैं एवं आगे जाकर इस पुस्तक को पढ़े हुए छात्र बड़े-बड़े वैज्ञानिक, डॉक्टर, इंजिनियर आदि बने हैं | हो सकता था कि राष्ट्रभाषा में विज्ञान की लिखी हुई पुस्तक नही रहती तो इतने उच्च स्तर को प्राप्त नही कर सकते थे | इसीलिए आज ये कहना हमलोगों के लिए ये कहना सर्वथा अनुचित होगा कि मातृभाषा में विज्ञान नही पढ़ा जा सकता है | या फिर इस भाषा में पुस्तक नही लिखी जा सकती है | थोडा सोचिये अच्छा होता की हम लोग अंग्रेजी में की पुस्तक आरंभिक वर्ग में ही रखे होते, मगर हमारे बच्चे इस समय शिक्षक, अभिभावक से आग्रह करते हैं कि हमको अगर अपने भाषा में समझा देते तो जल्दी समझ में आ जाती | अपनी भाषा सहज ग्राह्य है | तो कोई भी वैज्ञानिक तथ्य जीतनी जल्दी में अपने भाषा में खुद से पढ़ कर अथवा शिक्षक के द्वारा समझ कर अपने भाषा में ग्रहण किया जा सकता है, वहीँ पर अन्य किसी भाषा में नही | सभी मानते हैं कि विज्ञान अपेक्षाकृत कठिन विषय है | इसीलिए, विज्ञान की पढाई अगर शुरू से ही अपने मातृभाषा में किया जाए तो इस कठिन मने जाने वाले विषय के प्रति अरुचि उत्पन्न नही होगी | परिणामतः विज्ञान में रूचि होने से कालांतर में सब कुछ अपे आल्प ही समझ में आने लगेगी | मैथिली भाषा में विज्ञान की पुस्तक होने से यह संभव है की समाज में अपेक्षाकृत ज्यादा वैज्ञानिक सोच विकसित होगी | जिससे की अनेक तरह की सामाजिक कुरीति, अन्धविश्वास मिट सकती है | विज्ञान अर्थात विशेष ज्ञान जिस से सामाजिक कल्याण होता है, इसीलिए कौन नही चाहेगा कि विशेष ज्ञान की भाषा मैथिली हो | आज स्वरोजगार करने वाले बहुत सरे पढ़े-लिखे व्यक्तियों को विशेष ज्ञान एवं कौशल की आवश्यकता है, जिससे सबंधित तथ्य के पुस्तक की सर्वथा अभाव मैथिली में है | तो आज सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक विकास केलिए स्तरीय ल्पुस्तक मैथिली अवश्य ही होनी चाहिए | बहुत सरे विज्ञान की पुस्तक जापान में जापानी, फ्रांस में फ्रेंच, जर्मनी में जर्मन, चीन में चाइनीज भाषा में लिखी गई है | परिणामतः वहाँ वैज्ञानिक सोच का अभाव नही है, वहाँ ज्यादा समृधि है, विकास दर तीव्र है, ये देश सब वैज्ञानिक पराकाष्ठा पर पहुँच चुके हैं | हमलोग भी विज्ञान में आगें हैं, वैज्ञानिक सोच रखे हुए हैं, जिसके अनेकों कारण में मुख्य कारण अपना धर्म एवं संस्कृति है जिसका श्रोत प्राचीन ग्रन्थ वेड, वेदांग, गौतम, कपिल आदि के लिखे हुवे ग्रन्थ मुख्यतः तत्कालीन भारतीय भाषा संस्कृत में था | जो आज के वैज्ञानिक चिंतन एवं विकास के प्रमुख स्रोत के रूप में जाना जाता है | मैथिली में कृषि सबंधित पुस्तक निकले जाने से कम पढ़े - लिखे व्यक्ति भी जान सकते हैं कि उन्नत कृषि कैसे किया जा सकता है | जैसे बिना नमक के सब्जी नमकहीन हो जाता है ठीक उसी तरह बिना मातृभाषा को अपनायी गयी विद्या पूर्ण नही हो सकता है | इसीलिए, पहले आधार मजबूत करनी चाहिए, जिससे की आगें सबकुछ सहज रूप से ही सब कुछ ठीक हो जाएगी | दुकान दू, दू-दुनी चार सहजता से सिख जाते हैं बच्चे अपेक्षाकृत टू वनजा टू, टू-टूजा फोर के | प्रसिद्ध भौतिकी वैज्ञानिक आइंस्टाईन का सूत्र E=mc2 में प्रयुक्त तीनों भौतिक राशी के मध्य सम्बन्ध अपे भाषा में अच्छी तरह से समझ सकते हैं | आज इस प्रमुख सूत्र का कितनी ही बार मैथिली में चर्चा कीगई जो छात्र एवं अभिभावक के समझ में आ गई है | कहने का तात्पर्य यह है कि जटिल भौतिकी, गणितीय गणना आदि के लिए अगर भाषा बाधक बन जाए तो इस से गड़बड़ और कुछ नही है | बाल्यावस्था में अगर ठीक से पठन-पाठन के प्रति रूचि नही जागेगी तो यह भी संभव है की बाद में किसी खास विषय के प्रति अरुचि उत्पन्न होने से सदा केलिए विषय विशेष त्याज्य हो जाए | इसीलिए, प्रारंभिक सुनी गई भाषा अगर मातृभाषा मैथिली है, तो उस में पुस्तक स्वरुप तथ्य प्रस्तुत कर विद्यालीय शिक्षा में इसको मिला कर अथवा सामिल कर समाज का वज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ाया जा सकता है | आज मैथिली भाषा-भाषी कितने ही व्यक्ति जिनकी प्रारंभिक शिक्षा अपनी माँ से मिली है, अमरीका जैसे देश में वैज्ञानिक हैं, अगर मैथिली में विज्ञान पढने की बात की जाती है तो ऐसे व्यक्तियों से जाकर पूछा जा सकता है, हम भी पूछ चुके है और उसी आधार पर अपना मंतव्य प्रकट कर रहे हैं | कालांतर में बुद्धि के कुशाग्रता से अनेकानेक भाषा सिख कर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पलर उपलब्ध विज्ञान की पुस्तक का अध्ययन सरल रुल्प से ही की जा सकती है |इसकेलिए मातृभाषा कहीं पर भी बाधक नही हो सकता है, अपितु साधक ही होता है |

                  हमारा कहना यह है कि आनावश्यक दवाब में छात्र लोगों को ल्पधने से हानि ही होती है, लाभ नही | आज हमारे-आपके घर में बच्चे कंप्यूटर चलाने में समर्हथ हो रहे हैं, उसका एक मुख्य कारण एक-दुसरे से मैथिली में जटिल अनुप्रयोग गर में ही सीखना हो सकता है | आज समाज में वैज्ञानिक अनुप्रयोग की आवश्यकता है, जिसको देखने से, उस सम्बन्ध में मातृभाषा में बात करने से सामान्य व्यक्ति जो कि थोडा-बहुत जानते है, भुत कुछ जान कर समाज में जागरूकता फैला सकते हैं |अभी ये मात्र कुछ ही व्यक्तियों तक ही सिमित है | आज थोडा सोचिए, जो परस्पर बात-चित करने वाली भाषा में विज्ञान समझाने वाला कोई नही रहते तो, क्या हम जो भी कुछ अभी हैं, वो हम,  क्या हो सकते थे ? जैसे एक कलाकार अपने बच्चों को बहुत कुछ बाल्यावस्था में ही सिखा देते हैं, ठीक उसी तरह विशिष्ट वैज्ञानिक गतिविधि को उसी अभिभावक के द्वारा अपनी भाषा में पहुँचाया जा सकता है | आज समस्त प्राणी जगत में अपने क्षेत्रीय अधिकार के प्रति सजग होना एक प्राकृतिक स्वभाव बन गया है | इसीलिए, विषय विशेष के बारे में जानकारी मातृभाषा के अतरिक्त और किस में सुलभ हो सकता है | जैसे भू-सर्वेक्षण कार्य जो निश्चित माप के हिसाब से कागज पर दिखाया जाता है, उसमे ज्यामितीय गणना का प्रयोग किया जाता है, इसीमे जनसाधारण को जानने से स्वरोजगार कर अपने जीवन का निर्वाह किया जा सकता है | पर्यटन एवं यातायात से सम्बंधित ज्ञान मातृभाषा में होने से बहुत लाभ जनसामान्य को मिल सकती है | दूसरी ओर मौसम संबंधी, भू-गर्भित तथ्य पर्यावरण से संबंधित विषय वस्तु भी शीघ्रातिशीघ्र मातृभाषा में आना चाहिए | जिससे विनिष्ट हो रहे पर्यावरण की सुरक्षा हो सके | आज इलेक्ट्रानिक वस्तु सब भुत जयादा मात्रा में बेचीं जारही है, मगर इसको बनाने की जानकारी भुत कम आदमी को ही होती है, अगर जापान, चीन आदि देश में देखा जय तो घर-घर में लोग बहुत कुछ खुद ही बना लेते हैं | जैसा की मालूम हो कि कोयला के खान में मजदुर वर्ग दुर्घटना का शिकार होते हैं, जिसमे बहुत ग्रामीण एवं शहरी होते हैं, मगर अभीतक भी इनको मालूम नही है कि कोयला के खान में प्रमुख गैस मीथेन गैस, लैम्प के संपर्क में आने से दुर्घटना होता है | यह तो मात्र एक उदाहरण है जिसके पीछे वैज्ञानिक कारन है | क्या इस तरह के वैज्ञानिक कारण की जानकारी समाज के लोगों को नही होना चाहिए ? आज इस काम के लिए सर्वथा उचित माध्यम मैथिली ही हो सकता है | जैव प्रौद्योगिकी की जानकारी थोडा-बहुत हम लोगो को रखना होगा, जिससे लघु एवं कुटीर उद्योग स्थापित करने में बहुत ज्यादा मददगार साबित हो सकता है | भाषा में अनुप्रयुक्त प्रौद्योगिकी, कृषि में उपयोग होने वाले यंत्र, रसायन विज्ञान, सुचना प्रौद्योगिकी, ध्वनी एवं चलचित्र आदि में किए जाने वाले अनुप्रयोग की जानकारी मैथिली में उपयुक्त हो सकता है | क्षेत्रीय अनुसंधान प्रयोगशाला हो अथवा कोई उद्योग इस सब में मैथिली पूर्ण रूप से उपयुक्त होगा | कीटनाशक का व्यवहार आज खेती करने में घातक साबित हो रहा है जो कि सब जानते है कभी-कभी दुर्घटना हो जाता है | प्रदुषण जो बहुत भारी मात्रा में फैल रहा है उसकी जानकारी मैथिली में होना बहुत जरुरी है |  समय रहते ही कितने ही परेशानियों से निपटा जा सकता है जिस के लिए मातृभाषा में समाज में जानकारियों का प्रसार भुत ही लाभकारी साबित होगा | उसी तरह से हमलोग भी मिथिलांचल के कल्याण करने में सभी दृष्टि से सक्षम हो सकते हैं | अगर पढ़े-लिखे हुए लोग अपने मन में ठानालें कि समाज को मैथिली में कुछ जानकारी दें, जिसका विभिन्न स्रोत हो सकता है जैसे पुस्तक, बातचीत, संगोष्ठी, सेमिनार इत्यादि | यह तभी ही स्वभाविक रूपल लेगा जब हमलोग अपने परिवार में मैथिली को निश्चित रूप से विज्ञान में प्रयोग करेंगे |  
                                 THE END.
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About सौरभ मैथिल

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